क्या आप अपने भाग्य के नियंत्रण में हैं?

क्या आप अपने भाग्य के नियंत्रण में हैं? 

आम व्यवहार में यह वाक्य बड़ा प्रचलित है खासकर हमारे देश में, इसके दूसरे कई कारण हैं जो हमारे मूल विषय के केंद्र में नहीं हैं सो हम उन कारणों की चर्चा नहीं करेंगे। यह सच है हम जरूरत से ज़्यादा भाग्यवादी है। हमारे यहां लोग झट से सफलता व असफलता को भाग्य से जोड़ देते हैं। 


जबकि हमारे प्रसिद्ध व दुनियाभर में लोकप्रिय ग्रंथ गीता में लिखा गया है "कर्मण्येवाधिकारस्ते" । आज इस पोस्ट में मेरा विषय यही है कि सबकुछ भाग्य के नियंत्रण में है ? इस ब्लॉग पर आपके होने और इस लेख को यहां तक पढ़ने का ये मतलब है अपनी जीवन की आवश्यकता की पूर्ति,सफलता और अपनी खुशी को और शानदार बनाने की सोच रहे होंगे और लोगों द्वारा कहे गए के भाग्य से ही सबकुछ होता है इसके बारे में निश्चित तौर पर सोच रहे होंगे।

 यह सच है एक ही जैसे कार्य करने वाले लोगों में से कुछ लोग अपने प्रयासों में हमेशा सफल होते हैं कुछ लोगों सामान्य परिस्थितियों में ही सफल हो पाते हैं और बहुत ऐसे लोग हैं जो प्रयासों के बावजूद ऐसा नहीं कर पाते सफलता के शिखर तक नहीं पहुंच पाते। तो क्या हम भाग्य को कोसते हुये अपने प्रयासों को विराम दे दें और सफल होने की सारी खिड़कियों को बंद कर दें।आगे हम इन्हीं विषयों पर चर्चा करेंगे। हम अक्सर कहते हैं कि वे "भाग्यशाली" हैं, लेकिन मेरा मानना है कि भाग्य का इससे कोई लेना-देना नहीं है।सफलता की प्रथम कुंजी है कड़ी मेहनत पक्का इरादा इसके साथ निम्नलिखित छह कारक है जिन्हें ध्यान में रखते हुए हम व्यक्तिगत आकांक्षा, सफलता व खुशी प्राप्त करने के मार्ग को सुगम बना सकते हैं।

 1. स्व-छवि। 


फलता के लिये पहली महत्वपूर्ण कारण आपके स्वयं के बारे में आपका विश्वास है। आपका आत्मविश्वास वह पहला कारण है जो यह तय करता है कि आप कैसा महसूस करते हैं और आप दूसरों को कैसे दिखते हैं। आपकी यह आत्मछवि आपके आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। 

 2. आत्म नियंत्रण। 

          
 यह सोलह आने सच है कि या तो आप अपने जीवन को नियंत्रित करते हैं या आप इसके द्वारा नियंत्रित होते हैं। 

 3. रचनात्मकता। 


 सृजनशीलता या रचनात्मकता व्यापक अर्थों में आपके भीतर का असली कलाकार और वैज्ञानिक है। रचनात्मक सोच नए विचार उत्पन्न करता है यह आपकी समस्याओं का समाधान करता है। 

 4. सहयोग। 


 सफल होने के दूसरों का सहयोग जरूरी है एक आइसोलेटेड व्यक्ति न खुद के लिये न दूसरों के लिए कोई रचनात्मक सलाह या सहयोग देने लायक होता है। जो व्यक्ति संचार कौशल में इसके माध्यम से उस काम से संबंधित लोगों से त्वरित सम्पर्क बना सकता है और लक्ष्यों को साझाकर उसे राजी व प्रोत्सहित कर सकता है। 

 5. योजना। 


 ऐसा कहा जाता है, कि "यदि आप नहीं जानते कि आप कहाँ जा रहे हैं, तो आप कहीं और समाप्त हो जाएंगे"। यदि किसी के पास स्पष्ट और केंद्रित लक्ष्य नहीं हैं, तो वे शिकायत नहीं कर सकते कि "कहीं और" उनकी पसंद के अनुसार नहीं है। 

 6. एकाग्रता। 


 आगे बढ़ने की इच्छा, एकाग्र प्रयास, दृढ़ता और बाधाओं का सामना करने का लचीलापन - ये सभी जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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