भावनात्मक सम्बन्ध क्या है, इसकी कोई सीमा है?

 
भावनात्मक सम्बंध





भावनात्मक सम्बन्ध क्या है, इसकी कोई सीमा है? 

विवाह परम्परागत तौर पर विपरीत लिंगियों के बीच ही होता है। वैसे कई पश्चिमी देशों में समलैंगिक विवाह को भी कानूनी मान्यता प्राप्त है।

भारत में विवाह को अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह एक जन्म नहीं बल्कि सात जन्मों के रिश्तों की बात करता है। आज हम विवाह के बारे में ही बात करने वाले हैं।विवाह तो वैसे दो विपरीत लिंग के बीच होता है औऱ विवाह के पश्चात मित्रता और प्रेम पनपता है।पर क्या विवाह उपरांत पति व पत्नी विपरीत लिंग के किसी औऱ व्यक्ति के साथ मित्रवत सम्बन्ध रख सकते हैं ? ऐसी मित्रता की क्या सीमाएँ हैं?  ये सीमाएँ कौन निर्धारित करता है?  दोस्ती और भावनात्मक संबंध में क्या अंतर है?  क्या इमोशनल अफेयर गलत है?  क्या एक भावनात्मक संबंध एक साथी को सभी भावनात्मक निराशाओं को बाहर निकालने में मदद करता है, जो अन्यथा उसने अपने पति या पत्नी के साथ नहीं किया होता?  या यह शादी के रिश्तों के लिए खतरनाक  है?

     भावनात्मक संबंध क्या है?

विवाह पूर्व हममें से ज्यादातर लोगों के दोस्त होते हैं, हममें से कई लोग कुछ दोस्तों के  बहुत करीब होते हैं। हालांकि भारत में विपरीत लिंग के व्यक्तियों के बीच दोस्ती के उदाहरण काफी कम होते हैं परन्तु शिक्षा के स्तर के बढ़ने से अब ऐसी दोस्ती अजूबा नहीं मानी जाती है।  जब कोई विपरीत लिंग के व्यक्ति के साथ इतनी घनिष्ठ मित्रता विकसित करता है, तो इसे एक भावनात्मक संबंध कहा जा सकता है।  विपरीत लिंग के किसी व्यक्ति के साथ अंतरंग भावनात्मक विवरण साझा करना भावनात्मक संबंध कहलाता है।  यह सामान्य परिभाषा है।  इसमें यह खंड भी शामिल है कि आप अपने साथी को उस भावनात्मक बंधन से अनजान रख रहे हैं जो आप किसी और के साथ साझा करते हैं।


 क्या ऐसे भावनात्मक संबंध  शादी को नुकसान पहुंचा सकते है?


 जी बिल्कुल ऐसे सम्बन्ध  शादी को नुकसान पहुंचाते हैं।यदि आपका जीवनसाथी आपसे किसी ऐसे भावनात्मक सम्बन्धों का खुलासा करे तो पति या पत्नी को लगता है कि आपसी विश्वास का उल्लंघन हुआ है।  यदि भावनात्मक संबंध मजबूत हो जाते हैं, तो ऐसा हो सकता है कि व्यक्ति अपने जीवनसाथी के बजाय अपने मित्र के साथ अधिक भावनात्मक विवरण साझा करना शुरू कर दे।  इससे जीवनसाथी को दुख पहुंचता है और ब्रेक-अप भी हो सकता है।


 लोगों का इमोशनल अफेयर क्यों होता है?


 इस बात पर बहस हो रही है कि इमोशनल अफेयर विशुद्ध रूप से इमोशनल होता है या फिर इसकी शुरुआत शारीरिक आकर्षण के कारण होती है।  क्या भावनात्मक विवरण साझा करने के लिए विपरीत लिंग के मित्र की आवश्यकता है?  समान  लिंग में से एक के साथ ऐसे भावनात्मक सम्बन्द्ध क्यों नहीं बन सकते? विपरीत लिंग के व्यक्ति के साथ बने ऐसे भवनात्मक बंधन को लेकर कोई अपने जीवनसाथी के साथ असहज क्यों महसूस करता है?  दरअसल पति और पत्नी को विपरीत लिंग के व्यक्ति के साथ ऐसे किसी भी भावनात्मक रिश्ते  पर संदेह बना रहता है एक दूसरे को ऐसा लगता है कि ये सम्बन्ध शरीरिज सम्बन्ध में तब्दील न हो जाये। किसी से भवनात्मक सम्बन्ध बुरा नहीं है परन्तु यदि यह समान लिंग के लोगों के बीच हो तो जीवनसाथी को कोई संशय नहीं रहता।इसलिये विवाह के उपरांत इन बातों का ख्याल रखना सुखी वैवाहिक जीवन के लिये अच्छा होता है। यदि कोई अपनी भावनाओं को साझा करना चाहता है, या भावनाओं को बाहर निकालना चाहता है, तो वह समान लिंग के मित्र से साझा कर सकता है या किसी मनोचिकित्सक से परामर्श ले सकता है।  

 

इमोशनल अफेयर से कैसे बचें?


 यदि आपकी किसी मित्र से भावनात्मक रिश्ते हैं तो आपको  खुद से पूछने की जरूरत है- क्या यह केवल भावनात्मक है?  मुझे हर चीज के बारे में बात करने के लिए इस व्यक्ति की आवश्यकता क्यों है?  अपने जीवनसाथी से बात करें।  एक पल के लिए अपने दिमाग को अपने दिल पर नियंत्रण करने दें और शादी और बंधन के बारे में सोचें।  इससे भावनात्मक संबंध को बेहतर ढंग से समझने और इससे बाहर निकलने में मदद मिल सकती है। यदि आपके जीवन में भी ऐसा कोई रिश्ता है तो इसे नियंत्रित रखें,कोई गलतफहमी होने पर अपने जीवनसाथी को सॉरी बोलकर अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाएं।


 

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