अब मेरे बाबूजी इस दुनियां में नहीं हैं पर माता जी का साथ अभी तक बना हुआ है। उनके देखभाल में कोई कमी नहीं रहने देना चाहते परन्तु ढलती उम्र की समस्या व बदलती हुई समझ कभी कभी हमारे जीवन को भी तनावपूर्ण बना सकती है इसलिये मैंने स्वयं जो अनुभव किया है और उनकी उचित देखभाल तथा मेरे कामकाज पत्नी की घरेलू कार्यों में व्यस्तता सबमें संतुलन रखना बहुत आवश्यक है नहीं तो आप खुद बीमार हो सकते हैं, अवसाद में जा सकते हैं और अंततोगत्वा अभिभावकों की सेवा या देखभाल में भी कमी आ सकती हैं। इन मुश्किलों का बखान करते वक्त यह याद दिलाना चाहूंगा कि समस्या से भागने की जरूरत नहीं है न अपने अभिभावकों को ओल्ड एज केअर होम में डालना उचित है।
जैसा कि मैंने बताया कि मेरे माता पिता तबतक मेरे साथ रहने को तैयार नहीं थे जबतक उन्हें उनकी बढ़ती उम्र,बढ़ती उम्र की समस्याओं और किसी आकस्मिक स्थिति का हमने अहसास नहीं करवाया। आज अर्थ का युग है और माता पिता की देखभाल करने के लिए आपको कोई वेतन नहीं मिलता पर यह भी सच है कि एक बेटा और बहू जिस ढंग से माता पिता की देखभाल कर सकता है वह किसी भाड़े के नर्स या सहयोगी द्वारा मुमकिन नहीं है।
वृद्ध माता पिता की देखभाल की बड़ी समस्या है पीढ़ियों अंतर ,वो आपकी व्यस्तता, काम के स्वभाव से उतने परिचित नहीं होते।उम्र के ढलान के साथ उनमें असुरक्षा की भावना बढ़ जाती है, छोटी मोटी दुर्घटना से भी उन्हें मौत का डर सताने लगता है।जरा सी चूक या लापरवाही होने पर उन्हें यह लगता है कि आप उन्हें इग्नोर कर रहे हैं।पिता से ज्यादा यह भावना मांओं में ज्यादा होती है।यह शायद भारत के पितृसत्तात्मक समाज के प्रभाव की वजह से भी है।
जिन अभिभावकों की एक से अधिक संतान हो तो भी ऐसा देखा जाता है कि किसी एक कि ही जिम्मेदारी बन जाती है।मैंने तीन चार पुत्रों के माता पिता को भी बुढ़ापे के वक्त असहाय व बेचारगी की अवस्था में पाया है।हमने पुणे की उस महिला को याद रखना चाहिये जिनकी कंकाल उनके फ्लैट से बरामद हुई थी।दुर्भाग्य से उनके बेटे विदेशों में काफी अच्छी नौकरियों में थे।
माता पिता की देखभाल जरूरी है पर यदि आप औऱ आपकी पत्नी नौकरी शुदा हैं तो यह काम भी चुनौती पूर्ण हो जाता है।इसके लिये जरूरी है कि आपको अपने माता पिता के साथ खुद की देखभाल भी करनी होगी।याद रखें कि आप यदि स्वस्थ व प्रसन्न होंगे तो माता पिता की उतने ही अच्छे से ख्याल रख पाएंगे।
माता पिता या दोनों में से किसी एक कि देखभाल की जिम्मेदारी लेना आसान नहीं है आपको अनेकों कुर्बानियां देनी होती है।आप किसी टूर का कार्यक्रम नहीं बना सकते,रिश्तेदारों के फंक्शन के लिये ज्यादा दिन नहीं दे सकते यहां तक कि पति पत्नी साथ जाकर पार्क में बैठने का आनंद भी नहीं ले सकते क्योंकि आपको बाहर जाकर भी यह चिंता मन में बनी रहेगी कि आपकी अनुपस्थिति में वो कहीं बाथरूम में गिर न जाएं।
यदि आप मुझ जैसों में शामिल हैं तो आप समाज के लिए,दोस्तों के लिये भी समय नहीं निकाल पाएंगे।हमने पिछले पांच वर्षों में एक साथ कहीं बाहर नहीं निकल पाते टूर की तो छोड़िए बाजार जाने के लिये भी रूटीन बनाना पड़ा है।हम दोनों पति पत्नी एक साथ घर से बाहर निकलने के पहले किसी पड़ोसी की या किसी रिश्तेदार की मदद लेते हैं।ऐसा करना बुरा भी नहीं है क्योंकि उनकी देखभाल के लिये हमदोनों का तनाव रहित रहना व प्रसन्नचित रहना जरूरी है।
जब पिताजी की सुनने,देखने की क्षमता शून्य हो गयी तो छह माह हमने काफी तनाव में बिताए।कभी कभी रात रात भर और कई रातों को जगना पड़ता था मेरे हाइपर टेंशन की वजह से मैं अत्यधिक तनाव में रहता था और मेरी पत्नी भी बहुत चिड़चिड़ी हो गयी थी पर धीरे धीरे हमने उन स्थितियों में संतुलन बनाना सीख लिया।जरूरत पड़ने पर रिश्तेदारों, पड़ोसियों से मदद ली। हाउस मेड की तनखा बढ़ाकर कुछ काम उसको शिफ्ट किया तब जाकर थोड़ा शुकुन मिला।
दो वर्ष पहले पिताजी के गुजरने के बाद माताजी की देखभाल कर रहा हूं कोविड के आने के पहले सबकुछ लगभग सामान्य था औऱ जरूरत के हिसाब से उनका रेगुलर मेडिकल चेक अप होता रहता था।कोविड कि वजह से हमने उनकी सुरक्षा का अत्यधिक ख्याल रखा ।मैं चूंकि बाहर जाता था,डॉक्टरों के क्लिनिक में विजिट करता था तो उनसे दूर ही रहा करता।बीच में डॉक्टर चेक अप भी नहीं हुआ परन्तु उन्हें यह लगने लगा कि उन्हें इग्नोर किया जा रहा है। ऐसी स्थितियों में आपको काफी धैर्य रखने की जरूरत होगी।
क्योंकि यह देखा गया है कि देखभाल करने वाले काफी अलग-थलग पड़ जाते हैं। हममें से बहुत हैं जो माता पिता की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं वो अपनी समस्याओं से दूसरे को परेशान नहीं करना चाहते। कुछ लोग सहकर्मियों या नियोक्ताओं को अपनी इस समस्या के बारे में और उसके लिये कुछ रियायत की मांगों का खुलासा करने और उसके परिणामों से डरते हैं। मौन की सांस्कृतिक साजिश से देखभाल करने वालों को चुनौती दी जाती है।
हमारा युवा-केंद्रित समाज अप्रिय और अपरिहार्य वास्तविकता से आंखें मूंद लेता है वो इस बात को भूल जाते हैं कि एक दिन हमें भी इस स्थिति का सामना करना हम सब एक दिन बूढ़े होंगे और मृत्यु हो जाएगी।यदि हम इस तरह सोचे तो यह देखभाल करने वालों और देखभाल प्राप्तकर्ताओं दोनों को स्थितियों का सामना करने को तैयार करता है।
अब जब हमें अपने बूढ़े माता पिता का ख्याल आये तो आप खुद से पूछो आप उनके लिए "क्या कर सकते हैं""क्या होगा अगर " इन बातों पर अमल करना सुरु करें और इसकी एक योजना बनाई
तुम क्या कर सकते हो? "क्या होगा अगर" के बारे में बात करना शुरू करें और एक योजना बनाएं।
1. शुरुआत खुद से करें। यदि आप विकलांग हो जाते हैं या अप्रत्याशित रूप से मर जाते हैं तो आपका और आपके परिवार का क्या होगा? क्या आपके पास विकलांगता बीमा है? क्या आपकी एक इच्छा है? क्या आपके पास जीवित वसीयत है, और क्या आपने उस व्यक्ति की पहचान की है जो आपके द्वारा किए जाने वाले चिकित्सा विकल्प को बनाएगा यदि आप ऐसा करने की स्थिति में नहीं हैं?
2. स्वस्थ परिवार के सदस्यों से संपर्क करें। कहो, "मुझे आशा है कि आप कई खुशहाल वर्ष जिएंगे जिसमें आप उन सभी सुखों का आनंद लेंगे जिन्हें बनाने के लिए आपने बहुत मेहनत की है।" क्या आपने सोचा है कि अगर आप अब स्वतंत्र रूप से नहीं रह सकते हैं तो आपका क्या होगा? यदि कोई चिकित्सा घटना आपके सामने आती है, तो आपकी चिकित्सा का चुनाव कौन करेगा?
3. सामुदायिक संसाधनों की तलाश करें जो देखभाल करने में सहायता करते हैं। उदाहरण के लिए, एक दिन का कार्यक्रम, साथियों के साथ सामाजिक संबंध प्रदान करके आपके प्रियजन की मदद करता है। आपका समुदाय कार्यक्रम से आने-जाने के लिए परिवहन की पेशकश भी कर सकता है। घर से बाहर निकलने से शरीर को हिलने-डुलने का अतिरिक्त लाभ मिलता है। सामाजिकता और व्यायाम दो सबसे शक्तिशाली हस्तक्षेप हैं जो आपके प्रियजनों को अपने सर्वश्रेष्ठ रहने में मदद करते हैं।
4. उन मित्रों, परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को विशिष्ट सुझाव दें जो मदद करना चाहते हैं। जब वे कहते हैं, "मुझे बताएं कि मैं क्या कर सकता हूं," तो आप जरूर उनसे मदद लें उन्हक यह कहने में संकोच न करें कि "क्या आप इस सप्ताह मेरी मां को रेगुलर फिटनेस जांच के लिए डाक्टर के यहां ले जा सकते हैं।आपके पड़ोसी को जरूरी के कुछ सामान खरीदने को कह सकते हैं या फिर उन्हें कुछ देर तक के लिए अपने बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी लेने का आग्रह कर सकते हैं। "
5. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अच्छा पोषण, भरपूर नींद और नियमित व्यायाम करें। सर्दी-जुकाम से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोएं। हंसी, प्रार्थना या गहरी सांस के साथ अपने तनाव को प्रबंधित करें। अपनी आत्मा को उन गतिविधियों के स्वाद से पोषित करें जो आपकी बैटरी को रिचार्ज करती हैं जैसे कि आपकी पत्रिका या बागवानी में लिखना। अंत में, अगर आप उदास या चिंतित महसूस करते हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें।
इसलिये मां बाप या घर के किसी अन्य वरिष्ठ सदस्य के लिए अच्छी रुटीन, खुद के देखभाल के लिये पूरी प्लांनिग करें,खुद के स्वास्थ के प्रति सचेत रहें,लोगों से मदद लेने में संकोच न करें ।आप एक नेक कार्य कर रहे हैं जिन्होंने वर्षों आपका केअर किया अब जब उनके केयर की जिम्मेदारी आयी तो उसे साहस व विश्वास के साथ दोस्तों के बीच चर्चा कर।।


0 टिप्पणियाँ