सेलेब्रिटीज़ हमारे जीवन को कितना प्रभावित करते हैं।


 इसमें कोई शक नहीं कि हम सब किसी न किसी सेलेब्रिटी को बेइंतहा चाहते हैं उसके दीवाने होते हैं। यह आकर्षण, मोहब्बत पारम्परिक नहीं है बल्कि उस सेलिब्रिटी की अत्यधिक प्रशंसा या उसकी गढ़ी हुई छवि की वजह से है।हम यह जानते हुए भी कि जिससे हम शायद कभी नहीं मिलेंगे उसके दीवाने हो जाते हैं।हर दौर में ऐसे किसी सेलिब्रिटी ने,प्रसिद्ध लोगों ने मानव जाति के ऊपर प्रभाव डाला है।भारत की बात करें तो अमिताभ बच्चन उसी श्रेणी के सेलिब्रिटी हैं।  मास मीडिया के प्रादुर्भाव से पहले सेलेब्रिटीज़ की प्रसिद्धि को हम रेडियो,टेलीविजन पर मौखिक तौर पर देखते सुनते आए हैं। 
सफलता की शुरुआत सपने से होती है

 आज, हम अपनी आँखें खोलते हैं तो इन लोगों से बच नहीं सकते। एक विकसित समाज के लिये मनोरंजन भी जरूरी है। हम फ़िल्म व सीरियल देखते वक्त कुछ दृश्य ऐसे आते हैं कि हम भावुक हो जाते ,कभी रोते हैं तो कभी हंसते हैं हमारी मन में संजोए छवियों में फिल्मों के कई दृश्य,गाने, गीत व पसंदीदा अभिनेताओं के डायलॉग  भरी पड़ी है।  वे राजनीतिक, रोमांटिक, अच्छे और बुरे का नाटक करते हैं।  हम उनमें प्रेम और सफलता के आदर्शवादी आदर्शों की अभिव्यक्ति के रूप में पुरुष या महिला की पूर्णता की क्षमता देखते हैं।

गड़े खजाने किसी को यूं नही मिलते उसे ढूंढने के लिए दृष्टि व प्रयास जरूरी है।

 क्या सेलेब्रिटीज़ के लिए ये बेइंतहा दीवानगी वाजिब है ?आखिर सेलेब्रिटीज़ का हमारे जीवन पर कितना प्रभाव होना चाहिये ? कपड़ों, गहनों और हेयर स्टाइल की हमारी पसंद, हमारी भाषाएं और विचार अक्सर ऐसे क्षेत्र होते हैं जिन्हें परिभाषित करने के लिए हम मशहूर हस्तियों की ओर देखते हैं।  आम इंसानों के लिये इन प्रभावों से दूर रहना आसान नहीं होता क्योंकि हम काफी संवेदनशील हैं। हमारा जीवन व हमारी संस्कृति सेलिब्रिटी के प्रभाव से संतृप्त हो गई है। हम उनकी हर हरकत पर नजर रखते हैं कि वे किसके साथ हैं और क्या करते हैं।  हम उनकी राजनीति को आत्मसात करते हैं और उनके उद्धरणों को पकड़ लेते हैं।  हम सोचते हैं कि सेलेब्रिटीज़ की सुंदर, समृद्ध और शक्तिशाली होना कितना अच्छा हो सकता है।  प्रसिद्धि एक कामोद्दीपक है जो अदृश्य होकर हमारे ऊपर पर प्रभाव डालता रहता है हम कब उनकी गिरफ्त में आ गए इसका हमें पता भी नहीं चलता।


 एक सेलिब्रिटी यह जानते हैं कि उनकी डिमांड सिर्फ स्क्रीन पर मनोरंजन करने तक नहीं है वो अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करना भी बखूबी जानते हैं।इसलिये तो कभी विश्विद्यालय के समारोह में कभी खेल के मैदान में या फिर अन्य सार्वजनिक समारोहों में वे अचानक प्रकट हो जाते हैं।हम यह समझते हैं कि यह एक समय क्रिया है पर गौर कीजिए कि अमूमन वो कब ऐसा करते हैं।खासकर वो ऐसा तब करते हैं जब उनकी कोई फ़िल्म या शो रिलीज होने वाला होता है। सेलेब्रिटीज़ द्वारा विभिन्न उत्पादों के प्रचार को भी हम काफी अनुसरण करते हैं जबकि सच्चाई यह है उनके द्वारा प्रचारित उत्पादों का शायद वो कभी प्रयोग नहीं करते। हालांकि ये हस्तियां बिल्कुल वैसी कभी नहीं होती जैसा कि हम उन्हें स्क्रीन पर देखते हैं या बड़े समारोह में।इहमें से कुछ लोग जब किसी विवाद में फंसते हैं तो हमें इनकी असलियत का पता चलता है। 

उड़ान रंगों से नहीं अंदर के उमंगों से भरी जाती है।

परन्तु सेलेब्रिटीज़ के प्रति दीवानगी में कमी होती नजर नहीं आती अमेरिका जैसे उन्नत राष्ट्र भी इसमें पीछे नहीं हैं।भारत खासकर दक्षिण भारत के तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश में सेलेब्रिटीज़ ने मुख्यमंत्री तक की कुर्सी पाने में सफलता पाई है।उनकी दीवानगी इस कदर है कि अपने पसंदीदा सेलेब्रिटीज़ के लिये आत्महत्या तक करने को उतारू हो जाते हैं। ।  काश, सेलिब्रिटी की ताकत हमारे साथ रहने के लिए होती।  या यह है? हमें अमिताभ बच्चन जैसों को महिमामण्डित करने की बजाय यह जानना चाहिए कि हमारे वास्तविक लीडर्स जो सरकार में हैं वो कौन हैं, उनकी क्या पृष्ठभूमि है ताकि चकाचौन्ध से दूर हम सही व्यक्ति को नेता चुन सकें।अपने और अपने बच्चों के लिए सुखद भविष्य की गारंटी दे सके। 

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