बुढ़ापे का अकेलापन

 

Your Story से साभार

2011 में किये गए एक सर्वे के अनुसार भारत में लगभग डेढ़ करोड़ बुजुर्ग अकेले रहते हैं।ऐसे लोग बिल्कुल अकेले हैं न कोई उनकी रोजमर्रा की देखभाल के लिये उपलब्ध है न उनकी भावनाओं को साझा करने वाला।विकास के चढ़ते पायदानों के पीछे यह बड़ा दर्द है जिसके शिकार हो रहे हैं हमारे बुजुर्ग।

ऐसा नहीं कि हमें उनकी चिंता नहीं है पर विकास की अंधी दौड़ में शामिल होने को मजबूर अगली पीढ़ी के पास या तो बुजुर्गों की देखभाल के लिये पैसा नहीं है या फिर समय नहीं है।जो सिर्फ अपनी गुजर बसर करने के लिये महानगरों या शहरों में नौकरी या रोजगार करते हैं उनके पास पैसे व समय दोनों का अभाव है। जो पैसे से समृद्ध हैं उन्हें समय नहीं है वो बुजुर्गों की देखभाल के लिये नर्स,सेवक तो रख सकते हैं पर शकुन से बुजुर्गों के साथ घण्टे दो घण्टे बैठ नहीं सकते।

विकास की बढ़ती गति के साथ यह समस्या और गहरी होती जा रही है।अभी कुछ दिनों पहले मशहूर उद्योगपति विजयपत सिंघानिया की खबर हमने जरूर सुनी होगी कि किस तरह कभी अरबपति रहे विजयपत सिंघानिया आज दर दर की ठोंकरें खाते फिर रहे हैं।कुछ वर्षों पहले पुणे के एक फ्लैट में एक वृद्ध महिला के कंकाल मिलने की खबर भी आपने जरूर सुनी होगी।  यह विकासशील समाज का अभिशाप है, मजबूरी है या स्वार्थलोलुप होने का निशानी यह बहस बड़ी और निरर्थक है।

सार्थक चिंता यह है कि क्या बुढ़ापे के अकेलेपन को दूर करने का कोई उपाय है ?

सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं भी इस समस्या को समझ रही है और इसके हल ढूंढने का उपाय कर रही है।कुछ उद्यमी खासकर सामाजिक उद्यमी भी इस समस्या का हल ढूंढने में वर्षों से लगे हुये हैं। कुछ ऐसा ही हल ढूंढा है युवा उद्यमी हैं शांतनु नायडू जिन्होंने एक स्टार्ट अप Goodfellow की घोषणा की है।ये वही शांतनु नायडू हैं जो सबसे कम उम्र में देश के प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा द्वारा अपने  सहायक चुने जाने की वजह से चर्चा में आये थे।

शांतनु नायडू के इस स्टार्टअप को एक लाभ वाले सोशल इंटरप्राइजेज मॉडल की तरह लांच किया गया है। शांतनु नायडू का कहना है कि Goodfello पीढ़ी के बीच के अंतर को कम करने की दिशा में कार्य करेगा। इस स्टार्टअप से न सिर्फ बुजुर्गों का अकेलापन दूर होगा बल्कि 30 वर्ष से नीचे के युवा पीढ़ी को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा। Goodfellow दादा पोते के उम्र के लोगों के सोशल प्लेटफार्म की तरह दोस्ती का एक प्लेटफार्म की तरह काम करेगा व दो पीढ़ियों के बीच एक मनोवैज्ञानिक रिश्ते को मजबूत करने की दिशा में कार्य करेगा।

उम्मीद है शांतनु का Goodfellow भारत के बुजुर्गों के लिये वरदान साबित होगा व लाखों बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने में सहायक होगा।

Goodfellow को प्रोमोट करने व इसकी प्रगति पर शुरुआत से नजर रखने वाले श्री रतन टाटा भी काफी सन्तुष्ट हैं और शांतुन नायडू व उनकी टीम को इस स्टार्टअप की प्रगति के लिए धन्यवाद ज्ञापित कर चुके हैं।

आप Goodfellow के बारे में Your Story पर लिखे लेख से और ज्यादा जानकारी हासिल कर सकते हैं।


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