छठ पर्व का इतिहास और इसकी महिमा

 







पौराणिक कथा के अनुसार छठी मैया भगवान सूर्य की बहन हैं और कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को उदयाचल सूर्य को अर्ध्य देकर छठ पूजा सम्पन्न होती है। दीवाली के चार दिनों बाद नहाय खाय के साथ शुरू होकर उदय होते सूर्य को अर्ध्य देकर इस पर्व की समाप्ति होती है।

छठ पर्व हिंदुओ का एक पौराणिक एतिहासिक पर्व है।इस पर्व में साफ सफाई के साथ व्रती व घर के तमाम लोग कठोर अनुशासन का पालन करते हैं।आज जब पूरा विश्व कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए बड़ा चिंतित है तो विश्व को छठ पर्व से सन्देश लेने की जरूरत है।पर्यावरणविदों का मानना है कि छठ पर्व वास्तविक रूप में पर्यावरण संरक्षण व इको सिस्टम की रक्षा का संदेश देने वाला त्योहार है।


छठ भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासियों का एक प्राचीन हिंदू वैदिक त्योहार है। यह विशेष रूप से, भारतीय राज्यों बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और, झारखंड [और नेपाल के मधेश क्षेत्र में बड़ी ही पवित्र भाव व श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है ।छठ पूजा सूर्य देवता को  समर्पित है, ऐसी मान्यता है कि सूर्य देव  उन्हें पृथ्वी पर जीवन का वरदान देने और उनकी  मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं। इस अनुरोध को स्वीकार करने के लिए छठ व्रती सूर्य देवता का आभार प्रकट करते हैं। अब तो यह त्यौहार प्रवासी बिहारियों और नेपालियों द्वारा सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाने लगा है।


 छठ पर्व पवित्र नदियों, तालाबों और अन्य छोटे जल के स्रोतों  के आसपास सूर्य को अर्ध्य देकर मनाया जाता है।

जैसा कि हम जानते हैं कि यह  त्योहार भगवान सूर्य (सूर्य देवता) की पूजा के लिए समर्पित है।  "छठी मैया" गरीबों को शक्ति और सहायता प्रदान करने वाली देवी हैं।  उन्हें "त्योहार की देवी" के रूप में पूजा जाता है इसलिये इसे बड़ा पर्व भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार छठी मैया भगवान सूर्य की बहन हैं यह अनुष्ठान चार दिनों तक चलता है। पहले दिन नहाय खाय,फिर खरना तीसरे दिन अस्ताचल गामी सूर्य को अर्ध्य व चौथे दिन उदय होते सूर्य देवता को अर्ध्य देकर पर्व का पारन हो जाता है। यह  अनुष्ठान बड़ा ही कठिन है पहले दिन  पवित्र स्नान (नहाय खाय) फिर निर्जला उपवास , लंबे समय तक पानी में खड़े रहना, और डूबते और उगते सूरज को प्रसाद (प्रार्थना प्रसाद) और अर्घ्य देना शामिल है। कुछ भक्त अपने अपने घरों से नदी किनारे की ओर जाते समय साष्टांग प्रणाम(दंड)  भी देते हैं।


 पर्यावरणविदों ने दावा किया है कि छठ का त्योहार  पर्यावरण के सबसे अनुकूल धार्मिक त्योहारों में से एक है यह पर्व वास्तव में  "प्रकृति संरक्षण के संदेश" को फैलाने के लिए ही किया जाता है। जाति व छुआछूत के कलंक को सदियों से झेलने वाले भारत में छठ पर्व सारे बंधनों को तोड़ देता है। इस पर्व में जाति बंधन की सीमा आरे कभी नहीं आती हर व्रती पूज्यनीय हो जाता है।सम्भवतः यह व्रत  वैदिक काल के  "समानता, बंधुत्व, एकता और अखंडता" के विचारों को सार्थक करने वाला है। प्रत्येक भक्त चाहे वह किसी भी कुल या जाति का हो   सर्वशक्तिमान के सामने समान भाव से समर्पित होते हैं। सभी भक्त बिना किसी जाति, रंग या अर्थव्यवस्था में भेदभाव के, प्रार्थना करने के लिए नदियों या तालाबों के किनारे पहुंचते हैं।


 हालाँकि यह त्यौहार नेपाल के मधेश (दक्षिणी) क्षेत्र और बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड के पूर्वी भारतीय राज्यों में सबसे विस्तृत रूप से मनाया जाता है, यह उन क्षेत्रों में भी प्रचलित है जहाँ उन क्षेत्रों के प्रवासियों की उपस्थिति है।  यह भारत के सभी उत्तरी क्षेत्रों और प्रमुख उत्तरी शहरों,महानगरों  में मनाया जाता है।  यह त्यौहार भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान मुंबई, मॉरीशस, फिजी, दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिदाद और टोबैगो सहित अनेक देशों में मनाया जाता है।  , सूरीनाम, जमैका, कैरेबियन के अन्य भागों, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, मकाऊ, जापान और इंडोनेशिया आदि देशों में यह पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है।


 छठ पूजा, जिसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाई जाती है।  दिवाली के छह दिन बाद छठ पूजा होती है।  यह घटना कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को होती है।  नहाय खाय के बाद खरना मनाया जाता है।  महिलाएं 36 घंटे का उपवास रखती हैं छठ मैया और सूर्य की पूजा करती हैं।  यह उत्सव मुख्य रूप से भारत में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सदियों से लोकप्रिय है।  मान्यता है कि छठ पूजा का त्योहार बच्चों के सुख, समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए मनाया जाता है।  

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