उड़ान रंगों से नहीं अंदर के उमंगों से भरी जाती है।

उड़ान रंगों से नहीं अंदर के उमंगों से भरी जाती है।

 हमने काफी दिनों पहले शिव खेड़ा की पुस्तक जीत आपकी में एक मजेदार व प्रेरणादायक उद्धरण पढ़ा था जो मुझे आज भी याद है।उस उद्धरण में में मेले में गुब्बारे बेचते एक व्यक्ति व एक मासूम बच्चे का जिक्र है।गुब्बारे वाला हवा में उड़ने वाले गुब्बारे बेच रहा था,जब जब उसके गुब्बारे की बिक्री थोड़ी धीमी हो जाती तो वो एक गुब्बारे को हवा में छोड़ देता और थोड़ी ही देर में उसके गुब्बारे की बिक्री फिर बढ़ जाती।


जब वह गुब्बारे बेचन में व्यस्त था तो उसने यह महसूस किया कि कोई पीछे से उसकी कोट को खींच रहा है जब वो पीछे मुड़ा तो देखा कि एक मासूम सा बच्चा प्रश्नवाचक मुद्रा में उसके पीछे खड़ा था।उसने सोचा कि शायद ये बच्चा गुब्बारे खरीदना चाहता है तब तक बच्चे ने बड़ी मासूमियत से पूछा अंकल क्या ये बैंगनी रंग का गुब्बारा भी हवा में उड़ सकता है? गुब्बारे वाले ने प्यार से उसे बताया हां बेटे उड़ सकता है बिल्कुल उड़ सकता है ये गुब्बारे अपने रंगों की वजह से नहीं बल्कि अपने अंदर भरे गए गैस की वजह से उड़ते है।गुब्बारे किसी भी रंग के हों यदि उसमें ये उड़ने वाली गैस भर दी जाए तो अवश्य उड़ेगा ऐसा कहकर उसने बच्चे की जिज्ञासा शांत कर दी।

परन्तु यह कहते हुए उसने बड़ी बात कह दी जो हम सबको प्रेरित कर सकती है। हम अक्सर अपनी शिक्षा दीक्षा, आर्थिक हालात,पारिवारिक पृष्ठभूमि और अंत में अपने भाग्य को अपनी असफलता का कारण मान लेते हैं जबकि गुब्बारे वाले कि सीख यह है कि उड़ान पक्के इरादों और मन के होंसलों की वजह से होती है।आपके मन के अंदर जैसी सोच होगी आपकी उड़ान वैसी ही होगी।

मैंने अबतक कई मोटिवेशनल बुक्स पढ़ी है।उनमें सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली पुस्तक है शिव खेड़ा की You can Win अब इसकी पुस्तक की हिंदी अनुवाद जीत आपकी भी उपलब्ध है।जिसे लिंक पर क्लिक कर अमेज़न से खरीद सकते हैं।

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