बदलती कार्यशैली, कोरोना से उपजी हताशा, हर तीसरा मरीज anexiety का शिकार,तनाव,घबराहट, अनिंद्रा ,बेचैनी से कैसे बचें।


 

ओपीडी में आने वाला हर तीसरा मरीज एंग्जायटी(टेंसन,घबराहट,अनिंद्रा, बेचैनी...)का शिकार मिलता है तो ऐसे में इसकी अगली स्टेज डिप्रेशन या अवसाद और उससे बचने के कुछ उपायों के बारे में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर अपने  चिकित्सकीय अनुभव साझा करना जरूरी लगा।
हमारे देशवासियों में अवसाद ग्रस्त व्यक्ति के प्रति बहुत जजमेंटल होने की प्रवृत्ति, उस व्यक्ति की मौत के बाद तक नहीं खत्म होती।
उसके अवसाद को न परिवारजन समझते हैं न ही बाहर के लोग।  मदद तो बहुत दूर की बात है।

एक चिकित्सक के नाते मेरी कोशिश ऐसे मरीज़ो के परिजनों या खुद मरीज़ो को यही समझाने की  रहती की अवसाद मस्तिष्क की एक रासायनिक बीमारी है ( वही मुन्ना भाई वाला केमिकल लोचा) जो कि डेंगू, मलेरिया , टाइफाइड, बीपी, शुगर जैसी शारीरिक बीमारियों की ही तरह हममें से किसी को भी हो सकती है। मुझे भी हो सकती है, हुई भी है।

ये समझाइश भी उन्ही के साथ होती है जो इतने परिपक्व होते है कि ये बाते समझ सके । 
 
डोपामिन, सेरोटोनिन एवं अन्य रसायनों की मात्रा में नैनोग्राम के परिवर्तन और  अनुपात में गड़बड़ी हमारी क्षमता को दिन-प्रतिदिन के बाहरी तनावों से लड़ने में बेहद कम कर हमें अवसाद का शिकार बना सकती है।

बाइपोलर डिसऑर्डर या endogenous depression में तो बिना किसी खास वजह के भी आत्महत्या कर लेने तक का दुख मन को महसूस हो सकता है।

इन रसायनों का सही होना हमारे मस्तिष्क में मात्र और मात्र किस्मत है। बाहरी कंट्रोल न के बराबर है। हमारा अपना योगदान नगण्य ही है। 

इसलिए दूसरे पर हंसिये मत न ही कोई लेबल लगाइए उन पर जिनके मस्तिष्क की कोशिकाएं इन रसायनों को नहीं बना पा रहीं।

नींद, व्यायाम, मैडिटेशन, जीवन को हल्के से लेना जैसे कुछ उपाय  है जो अवसाद की सभांवना को कम करते हैं ।

अधिकतर पुरुष अवसाद होने पर शराब लेते हैं और ऐसा माना जाता है कि अल्कोहल दुख  को कम कर देता है किन्तु अल्कोहल अवसाद की अवस्था में आत्महत्या को प्रेरित करने वाला सबसे प्रमुख कारक है।

अधिकांश पुरुषों की आत्महत्या में अल्कोहल पोस्टमॉर्टम में जरूर मिलता है।

शराब भावनाओं की बढ़ा देता है। आप दुखी हैं तो और दुखी हो जाएंगे, क्रोधित हैं तो और क्रोधित हो जाएंगे। 

साथ ही डर खत्म कर inhibition खत्म कर देता है जिससे व्यक्ति के परिवार का क्या होगा जैसी बातों का त्याग कर ख़ुदकुशी का क़दम उठा सकता है।

सभी पुरुषों को सलाह है। अवसाद होने पर कभी अल्कोहल न लें।

 बेहतर 4 तरीके नीचे लिख रहा हूँ। ट्राई करियेगा, बेहद कारगर होंगे।

1.  नियमित व्यायाम करने की आदत डालें । Exercise से रक्त में endorphins  नामक हॉर्मोन्स का स्त्राव होता है। ये हॉरमोन स्ट्रेस से लड़ने और अच्छा महसूस कराने का काम करते हैं। 

2. बहुत ज्यादा सोचने या चीजो के अति विश्लेषण से बचे । किसी भी चीज पर बहुत ज्यादा सोचना या बात करना उसे और बढ़ा देता है।

3. अगर आप अपनी समस्या को समझ पा रहे है तो चिकित्सक के पास अवश्य जाए । दवाइयां आपकी बहुत मदद करेंगी । इस चक्कर मे न पड़े की उनकी आदत आपको पड़ जाएगी ।

जरूरत पड़ने पर बीपी और शुगर के मरीज भी इनकी दवाइयां ताउम्र खाते है जबकि अवसाद के मामलों में ऐसा कुछ दिनों के लिए ही होता है।

4. किसी भी बीमारी के लक्षण शारीरिक रूप से ही प्रकट होते है, चाहे भले रोग मानसिक ही क्यो न हो । एंग्जायटी के मरीज़ो में भी लक्षण ऐसे ही होते लेकिन ऐसे मरीज़ो की हर प्रकार की जाँचे सामान्य होती है जबकि लक्षण बने रहते है!

आपके परिजनों/मित्रों के साथ ऐसा बार बार हो रहा हो तो उसे जरूर किसी Doctor के पास ले जाये ।



 समय रहते डायग्नोसिस और इलाज से आप अपनो की कीमती जिंदगियां बचा सकते हैं!! 



                                MBBS,MD(PMCH)


 

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