शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान रखें वरना सब मिहनत व्यर्थ हो जाएगी।

 



लोगों की बदलती जीवन शैली ने हमारे स्वास्थ को बहुत प्रभावित किया है हालांकि लोगों में अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ी है  और लोगों ने  उचित आहार और व्यायाम के महत्व को महसूस किया है। हाल के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पिछले 20 वर्षों में लोगों ने खानपान का बेहतर खयाल रखा और योग,व्यायाम आदि से स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का ध्यान रखा है।इन सावधानियों का परिणाम यह हुआ है कि मनुष्य की औसतन आयु में वृद्धि हुई है। 


 लेकिन लोगों में अभी भी एक समझ की घोर कमी है कि उनके लिये  मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उनका शारीरिक स्वास्थ्य। जैसा कि मैंने कहा कि लोगों ने स्वास्थ्य पर पहले से अधिक ध्यान देना शूरू जरूर किया है।सुबह की सैर,व्यायाम और जिम में जाकर 1से 4 घण्टे की वर्क ऑउट करने,,भोजन में कम चीनी  लेते हैं परन्तु मानसिक स्वास्थ्य के बारे में अभी भी गंभीर नहीं हैं।हम अपने प्रॉफेशनल काम और कैरियर के प्रति इतने समर्पित हैं कि रोजाना 12-12 घंटे काम के बाद फिर देर रात तक घर में यहां तक के सप्ताहांत को भी बिजनेस या दफ़्तर के कार्यों में व्यस्त रहते हैं।जाहिर है इतना सब हम अपने कैरियर में आगे बढ़ने के लिए करते हैं अब यह सोचिये के यदि आपका दिमाग ओवरलोड हो जाये और ऑफिस में आपका ब्रेकडाउन हो जाये तो क्या होगा।

यदि आपका मानसिक स्वास्थ्य सही नहीं रहेगा तो आप कितना भी संतुलित आहार लें,कितना भी व्यायाम करें आप स्वस्थ नहीं रह सकेंगे। आप उच्च रक्तचाप,तनाव में रहेंगे और आपको स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ने की सम्भावना बढ़ जाएगी। आज हम आपको उपरोक्त परिस्थितियों से बचने और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने के कुछ उपायों की चर्चा करने वाले हैं। हालांकि आप यदि उक्त रक्तचाप या मधुमेह से ग्रसित हो चुके हैं तो चिकित्सक की सलाह सबसे ज्यादा जरूरी है। लेकिन मन को प्रसन्न रखने व खुद पर फोकस करना भी इन चीजों से बचने का विकल्प है।


प खुद के लिये समय निकालें और अपनी बाइक से लांग ड्राइव पर निकल जाएं।उन्मुक्त होकर खुली सड़क पर हवा से बातें करने में बड़ा आनंद आएगा। हां यात्रा आरम्भ करने के पहले सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना और जरूरी सेफ्टी गियर्स लेना न भूलें।

   हर रात एक या दो घंटे टेलीविजन देखने का आनंद लें तनाव भरी न्यूज़ चैनलों के चिल्ला चिल्ली वाली बहस की जगह मनोरंजक कार्यक्रम देखें इसमेंभी मजा आता है,  हर दिन 30 सेकंड के लिए जोर से हंसना तनाव को दूर करने का एक शानदार तरीका है।


तनाव मुक्त करने के लिए वीडियो गेम भी बहुत अच्छे हैं, यदि आप अपने बॉस पर गुस्सा निकालना चाहते  हैं तो गुस्सा निकाल लिजिये।

सामुदायिक कार्यों में हिस्सा लेना भी आपके तनाव को कम करने में मदद करता है और दूसरों की मदद कर आप असीम आनंद की अनुभूति करते हैं। गरीब व मेघावी बच्चों की सप्ताहांत में वर्कशॉप जैसे कार्यक्रम में भाग लेना भी आपको शांति व खुशी प्रदान करेगा।

Relaxing एवं शकुन देने वाले म्यूजिक सुनने से भी तनाव दूर होता है और आप शांति का अनुभव करते हैं। सप्ताहांत में परिजनों व मित्रों के साथ महफ़िल भी शुकुन देने वाली होती है।अपने  माता पिता,भाई बहनों ,मित्रों के परिवारों के साथ आसपास पिकनिक मनाना आनंददायक अनुभव है।


 


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