सफलता की शुरुआत सपने से होती है।

 




आपके सपने सच होने से पहले आपको सपने देखने होंगे।" - ए.पी.जे. अब्दुल कलाम। 

सफलता व सपनों का परस्पर सम्बंध है सपने सफलता की पहली सीढ़ी है।
अपने सपनों को मत छोड़ो, या तुम्हारे सपने तुम्हें छोड़ देंगे।"  - जॉन वुडन।

 महान व्यक्तियों की उपरोक्त उक्तियां बिल्कुल सही व सटीक है।आप अपने किशोरावस्था से ही जीवन में कुछ सपने पालते हैं कुछ निश्चय करते हैं और यदि इन सपनों के साथ आप दृढ़ संकल्प लेकर आगे बढ़ गए तो आपका लक्ष्य हासिल होगा आपके सपने सच होंगे।सपने देखने का अर्थ यह नहीं कि आप कपोल कल्पनाओं में डूबे बिस्तर पर क्विल्ट में दुबके रहें।अपने सपनों को साकार करने के लिये आपको मेहनत करनी होगी,बाधाओं को पार करना होगा तभी आप अपने सपनो को पूरा कर सकेंगे।


बिहार के माउंटेन मैन दशरथ मांझी की कहानी  आपने जरूर  पढ़ी होगी।उसका सपना था अपनी पत्नी की याद में  पहाड़ों के बीच एक सुगम रास्ता बनाना ।इतने कठिन काम को पूरा करने में उसे 22 वर्ष लग गए,कई बाधाएं आयी पर  अपनी कड़ी मेहनत व कड़ी मिहनत की बदौलत उन्होंने ऐसा कर दिखाया।।इसलिये बाधाएं अपना कमाल दिखाएंगी आपका रास्ता रोकेंगे परन्तु

जब कोई बाधा आये, तो इसे एक अवसर में बदल दें। आपके पास विकल्प है। आप बाधाओं पर विजय हासिल कर जीत सकते हैं और विजेता बन सकते हैं, या आप इन बाधाओं से हार कर निराश होकर बैठ सकते हैं । असफलता से निराश होकर आराम करने की तुलना में सफलता प्राप्त करने के लिए  थक जाना कहीं बेहतर है।"  - मैरी के ऐश।

सब कुछ दिल और दिमाग से शुरू होता है।  हर बड़ी उपलब्धि एक व्यक्ति के दिमाग में शुरू होती है। दशरथ मांझी की पत्नी पहाड़ को पार करने के क्रम में फिसल गई और उनकी मौत हो गयी तो  उन्होंने सपने देखने की हिम्मत की, यह विश्वास करने के लिए कि यह संभव है। आपको अपनी सोच बड़ी रखनी होगी आपकी बड़ी सोच आपकी सफलता की राह में आने वाली सारी बाधाओं को हल करने में बल प्रदान करेगा। नकारात्मक सोच को दूर रखें खुद को कभी निराश न होने दें।आप अपने लिए, अपने परिवार के लिए और दूसरों के लिए संभावनाओं का सपना देखें।  

मेरी मां अक्सर कहा करती थी कि बड़े सपने देखो अपनी क्षमता से भी बड़ा सपना देखो।फिर मन में विश्वास करो के इस सपने को हासिल करने के लिए पूरे मनोयोग से जुट जाओ।हालांकि सपने देखने वक्त वास्तविक स्थिति का भान होना आवश्यक हैं।एक कम पढ़ा लिखा व्यक्ति अरबपति बनने के सपने बेशक देख सकता है परन्तु एक दिव्यांग का किसी रेस में जितने का सपना देखना एक बुरा आईडिया है।

इन सब बातों के अलावा आपकी मिहनत व लगन जरूरी है।आपको सपने पूरे करने के योजना बनानी चाहिये उसे पूरा करने में जिन संसाधन की जरूरत हो इसकी एक लिस्ट बनानी जरूरी है।

तो सार यही है कि सफल होने के लिए ख्याली पुलाव बनाना जरूरी नहीं है पर सपने बुनना सबसे पहली शर्त है।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

google-site-verification: google6deb48c2e03ddce4.html