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| आदतें जो आपको महान बनाते हैं। |
किसी भी सफल व्यक्ति को जानने के बाद आप उससे रश्क करतें हैं कोई उनके व्यक्तित्व, कोई पारिवारिक पृष्ठभूमि तो कोई उनकी किस्मत को उनकी सफलता का श्रेय देते हैं। परन्तु किसी व्यक्ति की सफलता किसी एक कारणों से सम्भव नहीं होती।एक सफल व्यक्ति के जीवनचर्या का अध्ययन करें तो आप पाएंगे कि उनकी सफलता में उनकी आदतों का भी बड़ा योगदान होता है।
आविष्कारक, राजनेता, लेखक, प्रकाशक और अर्थशास्त्री बेंजामिन फ्रैंकलिन ने अपनी आत्मकथा में बताया है कि अपने जीवन की शुरुआत में उन्होंने "नैतिक पूर्णता" तक पहुंचने का फैसला किया। इस लक्ष्य को हासिल करने के उन्होंने 13 मानदंड तय किये, प्रत्येक को मानदंड को एक पन्ने में लिखा और नीचे उस मानदंड के बारे में संक्षिप्त रूप से वर्णित किय और फ्रेंकलिन ने प्रत्येक मानदंडों का एक निश्चित समय तक अभ्यास किया।
इन मानदंडों या सद्गुणों को एक आदत बनाने के लिए, फ्रेंकलिन ने प्रत्येक दिन व सप्ताह के हिसाब से एक टेबल बनाया। जब भी उनसे कोई गलती होती तो अपने टेबल में उसे लिख लेते। हर सप्ताह उन्होंने अलग अलग मानदंडों के पालन पर जोर दिया। इस तरह समय बीतते रहे और मानदंडों पर बार बार चलते रहने से यह उनकी आदतों में शुमार हो गया।
फ्रैंकलिन ने आगे लिखा कि उन्होंने सालों तक इस निजी परीक्षा को अंजाम दिया। काम को अच्छी तरह से करने के लिए उन्होंने प्रत्येक गुण और उसके महत्व का एक चौथाई प्रयास करने का फैसला किया। उन्होंने हर सप्ताह एक अच्छी आदतों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास किया । यह उतना आसान भी नहीं था, उन्होंने संयम के साथ शुरुआत की, जिसमें अवांछनीय आदतों के प्रति झुकाव को नियंत्रित करना शामिल था, क्योंकि जब आप अपने जीवन में नई आदतों को शामिल कर रहे होते हैं तो प्राचीन आदतों को त्यागना आसान नहीं होता इसलिये नई आदतों को सीखने के लिये असीम संयम की जरूरत होती है।
बेंजामिन फ्रेंकलिन ने जिन मानदंडो या सद्गुणों का द्वारा क्रमिक रूप से अभ्यास किया उनमें मौन, आदेश, संकल्प, मितव्ययिता, उद्योग, ईमानदारी, न्याय, संयम, स्वच्छता, शांति, शुद्धता और विनम्रता। इन सद्गुणों का पालन करने के लिये उन्होंने प्रत्येक दिन अपना समय नियोजित करने की एक छोटी योजना का पालन किया। प्रत्येक सुबह पांच से सात बजे तक वे शारीरिक रूप से व्यक्तिगत ध्यान में बिताते थे, थोड़ी देर प्रार्थना करते थे, दिन के व्यवसाय और संकल्पों पर विचार करते थे, अध्ययन करते थे और नाश्ता करते थे। आठ से बारह बजे तक वह अपने व्यापार में समय व्यतीत करते । बारह बजे से एक बजे तक उसने अपने बही खातों का निरीक्षण करते और भोजन करते। दो से पांच बजे तक पुनः वह अपने व्यापार में संलग्न होते थे करता। उसके पश्चात 10 बजे तक संगीत या किसी मनोरंजक कार्यक्रमों का आनंद लिया करते।
79 वर्ष की आयु में रिटायर होने से पहले की आखिरी दिन की परीक्षा के परिणाम के बारे में उन्होंने बताया कि उनके बेहतर स्वास्थ्य में संयम की बड़ी भूमिका थी। उद्योग और मितव्ययिता के लिए उन्होंने दुर्भाग्य को ; ईमानदारी और न्याय के प्रति उनके आचरण के अपने देश का उनके प्रति असीम विश्वास को कारण बताया।
जीवन और राजनीति में फ्रेंकलिन की असाधारण सफलता का श्रेय उनकी व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का भलीभांति और ईमानदारी से निर्वहन,निजी देनदारियों को चुकाने की उनकी दृढ़ता और लगातार बेहतर बनने की उनकी इच्छा को दिया जा सकता है।
अगली बार जब आप वास्तव में कुछ हासिल करना चाहते हैं, तो अपनी निजी दिनचर्या पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समय निकालें। आप यह ढूंढने की कोशिश करें कि वह कौन सा दुर्गुण है जो आपकी सफलता के मार्ग में बाधक है? यह तय करें कि "सफल होने की आदत" बनाने के लिए आप क्या कर सकते हैं?




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