क्या पैसे से खुशियां खरीदी जा सकती है? मुझे यकीन है कि ऐसे बहुत से लोग होंगे खासकर मुझे जानने वाले जो इस लेख को पढ़ेंगे और कहेंगे कि मैं पागल हूं।
सच कहूं तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता के लोग क्या कहेंगे? यकीन मानिए मैं किसी काम में हाथ लगाने से पहले यह जरूर सोचता हुं के क्या मैं जो करने जा रहा हूं वह सही होगा क्या यह मेरी जिंदगी के लिए , मेरे दोस्तों के लिये या मेरे चाहने वालों के लिए सही होगा।यदि मैं इस बात से आश्वस्त हूं कि यह सही है तो मैं इस बात को चिंता करता ही नहीं कि ' क्या कहेंगे लोग' और यकीन मानिए जब भी मैं क्या कहेंगे लोग की फोबिया का शिकार होता हूँ तो क्षणभर के लिए दुखी हो जाता हूँ।
अपने जीवन में शब्दों की शक्ति का प्रयोग
यहां मैं ईमानदारी से स्वीकार करता हूँ कि मैंने अपने निजी जीवन की कई महत्वपूर्ण बातों की उपेक्षा की है। मैं कुछ तम्बाकू का सेवन अपने छात्र जीवन से ही करने लगा था कुछ नकारात्मक लोगों की इस सलाह पर के धूम्रपान करने से एकाग्रता बढ़ती है अपना लिया।एकाग्रता तो बढ़ी नहीं पर एक नशे का आदि हो गया जिससे आजतक मुक्त नहीं हो पाया। नशा मुक्ति के उपायों को ढूंढते ढूंढते आत्मविश्वास,प्रेरणा विषय पर लिखे लेख ने प्रभावित किया और खुद ऐसे विषयों पर लिखने का निर्णय लिया।
आज उम्र की ढलान पर जो बातें सीख रहा हूँ वो नई बिल्कुल नहीं है बल्कि ये सुचना क्रांति का कमाल है कि सब कुछ बस एक क्लिक से आपकी मोबाइल की स्क्रीन पर दिखने लगता है। लगभग एक वर्ष तक इंटरनेट पर सैकड़ों ब्लॉग्स व वेबसाइट को सर्च किया और विभिन्न विषयों पर सैकड़ों लेख पढ़ें । इसके बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा के प्रेरणादायक ब्लॉग्स लिखकर मैं खुद के लिए एक नई शुरुआत कर सकता हूँ और दूसरों की मदद के मेरे जुनून को और भी बेहतर ढंग से कर सकता हूँ।
मैने लगभग तीस वर्ष वर्तमान नौकरी में बिताएं हैं जिसमें ढाई दशक एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव व सक्रिय ट्रेड यूनियन एक्टिविस्ट के तौर पर बिताए हैं। मेरे इस कालखण्ड में अपने कर्तव्यों व अधिकारों के लिए लोगों को जागरूक करने में लगाया है। आज इस लेख मैं इस बात पर लिखने वाला हूँ कि जीवन, स्वास्थ्य और खुशी में सबसे महत्वपूर्ण चीजें क्या हैं। लोग किस तरह क्षणिक खुशियों के लिये जीवन के महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ और खुशियां कुर्बान कर देते हैं।
अगर लोगों की बात करें तो वो कहेंगे पैसा ? कहेंगे कि जीवन में पैसा सबसे महत्वपूर्ण है, अमूमन आप अपने पुराने मित्रों ,पुराने पड़ोसियों या रिश्तेदारों से मिलते हैं तो वो पैसे यानि आपकी कमाई की बात करेंगे? आपके कार के मॉडल व घर या फ्लैट की बात करेंगे,घर में मौजूद गैजट्स या एप्लायंसेज की करेंगे,सूट की कीमत की बात करेंगे या फिर यह पूछेंगे की अबतक आपने किन किन जगहों की सैर की है।
ऐसे प्रश्न पूछने वालों में से अधिकांश के बारे में यह सोचता हूं कि उनके पास यह सब मौजूद होगा पर पूछने वालों में से अधिकांश के पास यह सब नहीं है । फिर मुझसे यह प्रश्न क्यों पूछते हैं तो वास्तव में ऐसे लोग जानकारी के लिये ऐसे प्रश्न पूछते हैं कि क्या हमने वो सब हासिल कर लिया है?
यकीन मानिए ऐसे प्रश्न मुझे बेहद उबाऊ लगते हैं और मुझे ऐसा लगता है कि वो बहुत दुखी हैं वो वास्तव में पैसों के लिए जुनूनी हैं। वैसे भी हमारे भारतीय परम्परा में औरतों की उम्र और पुरुषों की आय नहीं पूछने का प्रचलन है।
एक दो नहीं हमारे कई मित्र व रिश्तेदारों को हमेशा पैसे की बातें करते देखा देखता हूँ। वो झटपट अमीर बनने की फिराक में रहते हैं।
मैं ऐसे कई दोस्तों को जानता हूँ जो लॉटरी लगाते हैं इस विश्वास में वो रोज कुछ न कुछ हारते हैं और उम्मीद करते हैं कि एक न एक दिन जैकपॉट फंसेगा।अभी लॉटरी फंसी नहीं पर वो जीती गयी रकम से क्या क्या खरीदेगा की कल्पनाओं में मशगूल रहते हैं। मुझे ऐसे लोगों से कभी नहीं पटी है बिहार में एक कहावत चलती है" नदी में मछली नौ नौ टुकड़ा"।
हर व्यक्ति के जीवन की दो महत्वपूर्ण बातें हैं स्वास्थ और खुशी । ये दो चीजें पैसों से बिल्कुल खरीदी नहीं जा सकती।
लेकिन ये दोनों ही एक दूसरे की पूरक हैं यदि आप खुश रहेंगे तो आपका स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और यदि स्वस्थ रहेंगे तो चारो तरफ खुशियां ही खुशियां होंगी।
मैंने कई बार ऐसी स्थिति को नजदीक से देखा है कि पैसे रहते भी लोग खुशी नहीं रह पाते और खुश रहने वाले ज्यादातर लोग जीने लायक पैसे कमा ही लेते हैं। हाल ही में कोरोना के दौर में अधिकांश लोगों को यह बात समझ में आ गयी के पैसा कागज का टुकड़ा मात्र है।
मैंने जब ट्रेड यूनियन को अपना समय समर्पित करने का निर्णय लिया था मैंने कम से कम चार पांच व्यक्तियों को काफी करीब से देखा जिन्होंने ट्रेड यूनियन गतिविधियों की वजह से अपनी नौकरी खो चुके थे पर खुश थे खुश इसलिये थे कि ट्रेड यूनियन उनका जुनून था। वैसे लोगों से प्रेरित होकर ही मैंने ये कठिन रास्ता चुना और अभीतक की उपलब्धियों से खुश और संतुष्ट हूं। कुछ क्षणों में अगर दुखी होता हूँ तो उसकी वजह वही हैं "क्या कहेंगे लोग"।
आज हमारे इर्द गिर्द कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी नौकरी नहीं खोई, इंसेंटिव कमाया,कभी यूनियन गतिविधियों में अपने पॉकेट से पैसा नहीं खर्च किया ,रिटायर हुए बाल बच्चे अच्छी नौकरी में हैं पर उनके पैसे की भूख अभी भी खत्म नहीं हुई। आज भी वो दुखीराम ही बने हुए हैं।
तो सार यही है कि सफलता का मतलब सिर्फ ढेर सारा पैसा कमाना नहीं है और ढेर सारा पैसा आपको हवाई जहाज खरीद कर दे सकता है, आलीशान बंगला और लक्ज़री कार खरीदने योग्य बना सकता है पर खुशियां खरीद कर नहीं दे सकता। खुश रहना एक मानसिकता है, एक तयशुदा जीवनशैली का सुखद परिणाम है सो बड़े लक्ष्य निर्धारित करते समय मुनाफे के साथ साथ खुशियों का बजट भी उसमें जोड़ दीजिये।





1 टिप्पणियाँ
बहुत बढ़िया लेख
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